करवा चौथ त्याग और समर्पण का व्रत है.

इस व्रत में महिलाये निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लम्बी आयु की कामना करती है.

चाँद के दर्शन के बाद ही महिलाये जल और अन्न ग्रहण करती है.

गणेश जी की पूजा इस व्रत में की जाती है जो मंगल और सिद्धि के देवता माने जाते है. 

गणेश जी की पूजा करने से पति और पत्नी के जीवन में सुख और समिर्धि की प्राप्ति होती है.

साथ ही चन्द्रमा को अर्घ देने से दोनों के जीवन में चन्द्रमा जैसे सीतलता की प्राप्ति होती है. 

करवा चौथ सिर्फ एक धार्मिक व्रत नहीं है बल्कि ये प्रकीर्ति पूजा का प्रतिक भी है. 

इस व्रत का ये सन्देश है की पति और पत्नी के जीवन में सुख और शांति तभी संभव है जब वे प्रकीर्ति के साथ तालमेल बनाये रखे.

इस व्रत के माध्यम से पति और पत्नी के रिश्ते बहुत ही मजबूत हो जाते है. 

ये एक ऐसा अवसर है जब पति पत्नी एक दूसरे के प्रति अपने प्रेम, निष्ठां और आदर को फिर से जीवित करते है.

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